Sunday, October 30, 2011

संघ से भयभीत टीम अन्ना ?

कभी अन्ना कहते है की वे संघ के किसी पदाधिकारी का नाम तक नहीं जानते, और संघ का कोई कार्य करता उनके आन्दोलन में शामिल नहीं था. कभी कश्मीर मुद्दे पर तमाचा खा चुके प्रशांत कहते है की संघ उन्हें समर्थन दे इस्ससे उन्हें परहेज है.....और फिर कहते है की परहेज नहीं है...

प्रश्न यह है की अन्ना का आन्दोलन राष्ट्रीय है या वैक्तिक? क्या संघी विचारधारा के लोग भारतीय नागरिक नहीं है? और यदि अन्ना राष्ट्रीय आन्दोलन चला रहे है तो कौन संघी है कौन बजरंगी है, कौन भाजपाई कौन कांग्रेसी?? कोई भी व्यक्ति पहले भारतीये है, पहले राष्ट्र का है बाद में किसी पार्टी या बिचारधरा का. और इस हिसाब से संघ या किसी अन्य संघटन के कार्य करता का पूरा अधिकार है की वे किसी भी राष्ट्रीय मुद्दे के आन्दोलन में भाग लें और कार्य करें.
यदि अन्ना या उनकी टीम ये समझती है की संघ से अपरिचय दिखा कर वे किसे उजले कुरते वाली जमात में बने रहेंगे तो वे भयानक भूल की तरफ है....और निश्चय ही आत्म प्रवंचन और भटकाव की तरफ बढ़ रहे है.....

राष्ट्रीय आन्दोलन कभी भी जाती सम्प्रदाए या वैक्तिक वैचारिक सीमावो  से बांध कर नहीं चलते...यदि हम जाती और संप्रदाय  या विचार धारा के हिसाब से देखने लगे तो सड़क पर अकेले अन्ना ही बचेंगे.

संघ एक राष्ट्रवादी संघटन है उनकी अपनी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा है....और वे कोई पाकिस्तानी आतंक वादी संघटन नहीं जिसके लोग आराम से जेलों में बिरयानी खा रहे है.......ये अलग बात है की भारत में संघ का चुनावी समर्तः (बी जे पी) के रूप में इस देश में वैसा न हो किन्तु उनकी विचारधारा के बहुतायत बिन्दुवों पर किसी भी राष्ट्रवादी भारतीय को समस्या नहीं हो सकती या होनी चाहिए एसा मेरा मानना है....

मुझे नहीं लगता अन्ना को एसे अनावश्यक मुद्दों पर सफाई या बयानबाजी करनी चाहिए. राष्ट्र सबका सामान रूप से है चाहे वो मुस्लमान हो या हिन्दू....संघी या मार्क्सिस्ट अथवा कांग्रेसी....इस तरह की अनावश्यक बयानबाजियों से अन्ना असल मुद्दों से भटकेंगे और और इस राष्ट्रीय लडाई को गहरी छति  पंहुचेगी......